हर साल करवा चौथ से दो दिन पहले वही सवाल आना शुरू हो जाता है। मोहल्ले के एक पंडित जी एक तारीख बता रहे हैं, फोन का कैलेंडर दूसरी दिखा रहा है, और घर में बहस चल रही है कि किसकी बात मानी जाए।
इससे भी ज्यादा उलझन चंद्रोदय के समय को लेकर होती है, क्योंकि टीवी पर एक समय चलता है और छत पर चाँद उससे आधा घंटा बाद दिखता है।
दोनों उलझनों की जड़ एक ही है। लोग तिथि को एक दिन समझ लेते हैं और चंद्रोदय को एक पूरे देश का एक ही समय मान लेते हैं। दोनों बातें गलत हैं, और दोनों की वजह गणित में साफ लिखी है।
करवा चौथ 2027 की तारीख
साल 2027 में करवा चौथ मंगलवार, 19 अक्टूबर को है। तिथि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, जिसे संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है।
यह तारीख इस साइट के अपने पंचांग इंजन से निकाली गई है और तिथि से अलग से मिलान की गई है।
चंद्रोदय का सटीक समय इस पन्ने पर जानबूझकर नहीं दिया गया है, क्योंकि वह हर शहर के लिए अलग होता है और उसे आपके अपने अक्षांश और देशांतर से गिनना पड़ता है। जो समय बिना शहर पूछे बता दिया जाए, वह किसी और शहर का समय है।
यह व्रत चंद्रोदय पर ही क्यों पूरा होता है
ज्यादातर व्रत सूर्य के हिसाब से चलते हैं। सूर्योदय से शुरू, सूर्यास्त पर या अगले सूर्योदय पर समाप्त। करवा चौथ का विधान इससे अलग है। इसमें व्रत का पारण चंद्रदर्शन और चंद्रार्घ्य के बाद होता है, इसलिए व्रत की असली समाप्ति सूर्य से नहीं, चंद्रमा से तय होती है।
व्रत-निर्णय के शास्त्रीय ग्रंथों में इसे चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी कहा गया है। यानी वह दिन लिया जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि चल रही हो। यही नियम पूरे विवाद को सुलझाता है। अगर चतुर्थी सूर्योदय के समय चल रही है पर चंद्रोदय से पहले खत्म हो जाती है, तो व्रत उस दिन नहीं होगा, चाहे कैलेंडर पर उस दिन चतुर्थी लिखी हो।
इसीलिए करवा चौथ की तारीख कभी-कभी उस दिन से एक दिन आगे-पीछे दिखती है जिस दिन आपके कैलेंडर पर चतुर्थी छपी है। यह छपाई की गलती नहीं होती। यह दो अलग नियमों का फर्क होता है।
चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग क्यों होता है
चंद्रोदय का मतलब है वह क्षण जब चंद्रमा आपके क्षितिज से ऊपर आता है। क्षितिज आपकी जगह की चीज है, इसलिए यह क्षण जगह के साथ बदलता है।
दो कारण हैं। पहला देशांतर। पूर्व के शहरों में चंद्रमा पहले उगता है। कोलकाता और मुंबई के देशांतर में लगभग 15 अंश का फर्क है, जो अकेले ही करीब एक घंटे का अंतर बना देता है।
दूसरा अक्षांश। चंद्रमा का पथ भूमध्य रेखा से झुका हुआ है, इसलिए उत्तर और दक्षिण के शहरों में उगने का कोण अलग होता है और समय में और कुछ मिनट का फर्क जुड़ जाता है।
व्यावहारिक बात यह है कि दिल्ली, लखनऊ, जयपुर, मुंबई और पटना में चंद्रोदय एक साथ नहीं होगा। फर्क आधे घंटे से ज्यादा भी हो सकता है। इसलिए किसी चैनल या ऐप पर दिखा एक अकेला समय आपके शहर के लिए तब तक सही नहीं है जब तक वह आपके शहर के लिए गिना न गया हो।
तिथि चौबीस घंटे की नहीं होती
यह वह बुनियादी बात है जो सारी उलझन की जड़ है। तिथि एक दिन नहीं है। तिथि एक कोण है।
चंद्रमा और सूर्य के देशांतर का अंतर लीजिए। अमावस्या पर यह शून्य होता है और अगली अमावस्या तक बढ़कर 360 अंश हो जाता है। इस 360 अंश को तीस बराबर हिस्सों में बाँट दीजिए। हर हिस्सा 12 अंश का है और वही एक तिथि है।
चंद्रमा की गति एक जैसी नहीं रहती, क्योंकि उसकी कक्षा दीर्घवृत्ताकार है। कभी वह दिन में साढ़े ग्यारह अंश चलता है, कभी पंद्रह अंश से ज्यादा। इसलिए 12 अंश का यह अंतर कभी जल्दी पूरा होता है और कभी देर से। एक तिथि की लंबाई लगभग साढ़े इक्कीस घंटे से लेकर छब्बीस घंटे तक जाती है, और औसत करीब तेईस घंटे सैंतीस मिनट रहता है।
यही वजह है कि तिथि किसी भी समय शुरू और खत्म हो सकती है, और यही वजह है कि कौन सा सूरज या कौन सा चाँद उस तिथि को छूता है, इसी से तारीख तय होती है। मकर संक्रांति इसका उल्टा उदाहरण है, क्योंकि वह सूर्य की राशि-संक्रांति से तय होती है और इसीलिए ग्रेगोरियन कैलेंडर पर लगभग स्थिर रहती है।
सबसे आम गलतफहमी
सबसे ज्यादा जो गलती दोहराई जाती है, वह यह है कि लोग करवा चौथ की चतुर्थी को गणेश चतुर्थी वाली चतुर्थी समझ लेते हैं और सोचते हैं कि चाँद शाम को सूर्यास्त के आसपास निकल आएगा।
गणेश चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चतुर्थी है, यानी अमावस्या के चार तिथि बाद। उस दिन चाँद सूर्यास्त के थोड़ी देर बाद ही डूब जाता है। करवा चौथ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है, यानी पूर्णिमा के चार तिथि बाद। उस दिन चाँद देर रात की तरफ निकलता है। दोनों का नाम एक है और दोनों की खगोलीय स्थिति उल्टी है।
दूसरी आम गलतफहमी यह है कि व्रत सूर्यास्त पर पूरा हो जाता है। ऐसा मान लेने पर लोग शाम को ही पारण की तैयारी कर लेते हैं और फिर घंटों इंतजार करते हैं। विधान चंद्रदर्शन का है, और चंद्रदर्शन सूर्यास्त के काफी बाद होता है। कितना बाद, यह अगला हिस्सा बताता है।
वह बात जो शायद ही कोई बताता है
चंद्रोदय हर तिथि पर लगभग अड़तालीस मिनट खिसकता है। इसका कारण सीधा है। एक तिथि में चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे निकलता है, और आकाश 15 अंश प्रति घंटे की दर से घूमता है, इसलिए 12 अंश का मतलब हुआ बारह बटा पंद्रह घंटा, यानी अड़तालीस मिनट।
अब इसे करवा चौथ पर लगाइए। पूर्णिमा के दिन चाँद ठीक सूर्यास्त के आसपास उगता है, क्योंकि तब वह सूर्य के ठीक सामने होता है। कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पूर्णिमा के चार तिथि बाद आती है। चार गुणा अड़तालीस मिनट यानी लगभग तीन घंटे बारह मिनट। इसलिए करवा चौथ पर चंद्रोदय सूर्यास्त के करीब सवा तीन घंटे बाद पड़ता है।
यह एक अनुमान है, सटीक समय नहीं। असली गणना में चंद्रमा की उस दिन की अपनी गति, उसका क्रांति-कोण और आपके शहर का अक्षांश तीनों जुड़ते हैं, और इससे बीस-पच्चीस मिनट इधर-उधर हो सकता है।
पर यह अनुमान आपको एक चीज दे देता है जो किसी ऐप के आँकड़े से नहीं मिलती, और वह है यह समझ कि चाँद देर से क्यों निकलता है। जिस दिन आप यह वजह जान जाते हैं, उस दिन से कोई गलत समय आपको भ्रमित नहीं कर सकता।
दिन का क्रम, ज्योतिषीय नजर से
परंपरा में दिन सरगी से शुरू होता है, जो सूर्योदय से पहले ली जाती है। फिर पूरे दिन निर्जल या फलाहार व्रत रहता है। शाम को कथा और पूजा होती है, और अंत में चंद्रदर्शन, अर्घ्य और पारण।
ज्योतिष की तरफ से इसमें दो ही चीजें गिनने लायक हैं। पहली, उस दिन चतुर्थी तिथि कब से कब तक है। दूसरी, आपके शहर में चंद्रोदय कब है। बाकी सब परंपरा और परिवार का रिवाज है, और उस पर किसी गणना की राय की जरूरत नहीं। इस साइट का काम सिर्फ पहला हिस्सा है, और उसी हिस्से के लिए मैं जिम्मेदारी लेता हूँ।
अगर आप यह जानना चाहते हैं कि तिथि और सूर्योदय के नियम बाकी त्योहारों पर कैसे लगते हैं, तो होली और महाशिवरात्रि दोनों अच्छे उदाहरण हैं। महाशिवरात्रि का निर्णय निशीथ काल से होता है, जो आधी रात का हिस्सा है, इसलिए वहाँ भी सूर्योदय वाला सीधा नियम काम नहीं करता।
चंद्रमा और यह व्रत
शास्त्रीय ज्योतिष में चंद्रमा मन का कारक है, और वही ग्रह है जिसकी स्थिति से नक्षत्र और दशा दोनों निकलते हैं। करवा चौथ एक ऐसा व्रत है जिसका पूरा समय-निर्धारण चंद्रमा से बँधा है, और यह अपने आप में दिलचस्प है, क्योंकि हिंदू पंचांग में ऐसे व्रत गिनती के ही हैं।
इससे आगे मैं कोई दावा नहीं करूँगा। यह व्रत आपके जीवन में क्या करेगा, यह ज्योतिष का सवाल नहीं है और इसका कोई गणितीय जवाब नहीं है। हाँ, अगर आप अपनी कुंडली में चंद्रमा की स्थिति को समझना चाहते हैं, तो चंद्र महादशा वाला पन्ना यह बताता है कि दस साल की वह अवधि कैसे गिनी जाती है और उसका आधार क्या है।
करवा चौथ 2027 के लिए इतना याद रखिए। तारीख 19 अक्टूबर, मंगलवार। तिथि आश्विन कृष्ण चतुर्थी। चंद्रोदय अपने शहर के लिए गिनवाइए, और किसी एक राष्ट्रीय समय पर भरोसा मत कीजिए।
करवा चौथ 2027 कब है?
करवा चौथ 2027 मंगलवार, 19 अक्टूबर को है। तिथि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी है। यह तारीख इस साइट के पंचांग इंजन से गिनी गई है और तिथि से अलग से मिलाई गई है।
करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय क्या है?
चंद्रोदय हर शहर के लिए अलग होता है, क्योंकि वह आपके देशांतर और अक्षांश दोनों पर निर्भर करता है। दो शहरों के बीच आधे घंटे से ज्यादा का फर्क सामान्य है। अपने शहर के अक्षांश-देशांतर से गिना हुआ समय ही इस्तेमाल कीजिए।
व्रत सूर्यास्त पर क्यों नहीं टूटता?
करवा चौथ का विधान चंद्रदर्शन और चंद्रार्घ्य के बाद पारण का है, इसलिए इसकी समाप्ति चंद्रमा से तय होती है। व्रत-निर्णय के ग्रंथ इसे चंद्रोदयव्यापिनी चतुर्थी कहते हैं, यानी वह दिन जिसमें चंद्रोदय के समय चतुर्थी चल रही हो।
चाँद इतनी देर से क्यों निकलता है?
हर तिथि पर चंद्रोदय लगभग अड़तालीस मिनट आगे खिसकता है। पूर्णिमा पर चाँद सूर्यास्त के आसपास उगता है, और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी पूर्णिमा के चार तिथि बाद आती है, इसलिए चंद्रोदय सूर्यास्त के लगभग सवा तीन घंटे बाद पड़ता है। सटीक समय शहर के हिसाब से बदलता है।
क्या करवा चौथ और गणेश चतुर्थी एक ही तिथि हैं?
दोनों चतुर्थी हैं और दोनों के पक्ष उल्टे हैं। गणेश चतुर्थी शुक्ल पक्ष की है, जिसमें चाँद सूर्यास्त के थोड़ी देर बाद डूब जाता है। करवा चौथ कृष्ण पक्ष की है, जिसमें चाँद देर रात की तरफ उगता है।
कैलेंडर अलग-अलग तारीख क्यों दिखाते हैं?
तिथि की गणना सब जगह एक जैसी होती है। फर्क उस नियम में आता है जो उसके ऊपर लगाया जाता है। कोई संकलन सूर्योदय वाली तिथि लेता है और कोई चंद्रोदय वाली, और शहरों के सूर्योदय-चंद्रोदय भी अलग होते हैं। इसलिए दो कैलेंडर अपने-अपने नियम से सही हो सकते हैं।

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