नक्षत्र देवता और चिन्ह: पढ़ने की असली कुंजी
नक्षत्र को सिर्फ उसके स्वामी ग्रह से पढ़ना आधी जानकारी है। देवता और चिन्ह अक्सर वह बताते हैं जो स्वामी नहीं बता पाता।
पढ़ें →राशि और लग्नलग्न के भाव स्वामी: बारह लग्न की पूरी तालिका
बारह लग्नों के लग्नेश, छह योगकारक ग्रह, केंद्राधिपत्य दोष और बाधक स्थान का पूरा नियम एक जगह।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगगुरु पूर्णिमा 2027: आषाढ़ की पूर्णिमा और अधिक मास का असर
गुरु पूर्णिमा 2027 में 18 जुलाई, रविवार को है। साथ में अधिक मास की वह गणना जो हर साल तारीख़ खिसका देती है।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकग्रह दृष्टि: मंगल, गुरु और शनि की विशेष दृष्टि
हर ग्रह सातवें भाव को देखता है. मंगल, गुरु और शनि की अतिरिक्त दृष्टियाँ क्यों हैं, इसका असली कारण दृष्टि-बल के अंश हैं.
पढ़ें →योग और दोषगण कूट: देव, मनुष्य, राक्षस का असली मतलब
राक्षस गण का मतलब बुरा इंसान नहीं होता। यह स्वभाव की एक श्रेणी है और छत्तीस गुणों में इसका हिस्सा सिर्फ छह का है।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकअस्त ग्रह: सूर्य के पास आकर ग्रह क्यों कमज़ोर पड़ता है
अस्त की सीमा हर ग्रह के लिए अलग है और वह सीमा उसकी चमक से जुड़ी है। साथ में वह गलत व्याख्या जो सबसे ज़्यादा डराती है।
पढ़ें →योग और दोषयोनि कूट: चौदह योनि और चार अंक
योनि कूट की पूरी तालिका, सात वध जोड़ियाँ, और वह अकेली योनि जिसका कोई जोड़ा ही नहीं है।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगतिथि क्या है: चाँद और सूरज के बीच बारह अंश
तिथि दिन नहीं है। यह सूर्य और चंद्रमा के बीच बारह अंश का फासला है, और यही वजह है कि हर व्रत की तारीख पर बहस होती है।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगरक्षा बंधन 2027: राखी का शुभ समय और भद्रा का नियम
रक्षा बंधन 2027 की तिथि, भद्रा का असली नियम, और वह गलतफहमी जो हर साल दोहराई जाती है।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगपंचांग के पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण
पंचांग के पाँचों अंग किस गणित से बनते हैं, और वह सूर्योदय वाला नियम जिसे लगभग हर कोई गलत समझता है।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगकृष्ण जन्माष्टमी 2027: अष्टमी और रोहिणी का मेल
जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त को है। असली नियम अष्टमी तिथि का निशीथ काल में होना है, रोहिणी नक्षत्र का मिलना उससे अलग बात है।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगहनुमान जयंती 2027: दो तारीखें, दोनों सही
हनुमान जयंती 2027 चैत्र शुक्ल पूर्णिमा की गणना में 20 अप्रैल को है। दूसरी परंपराएँ अलग दिन क्यों रखती हैं, यह पूरा गणित यहाँ है।
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