आत्मकारक: सबसे ज़्यादा अंश वाला ग्रह
जैमिनी के चर कारक कैसे निकलते हैं, आत्मकारक की गणना में अंश क्यों देखा जाता है राशि नहीं, और यह पराशर के स्थिर कारकों से अलग क्यों है।
पढ़ें →दशाएँअंतर्दशा क्या है: महादशा के अंदर का चक्र
अंतर्दशा का सूत्र, नौ उपअवधियों का क्रम, और वह गणित जिससे हर अंतर्दशा की अवधि दिनों तक निकाली जा सकती है।
पढ़ें →त्योहार और पंचांगअभिजित मुहूर्त: दिन का वह हिस्सा जो लगभग हर दोष काटता है
अभिजित दिन का आठवाँ मुहूर्त है और हर शहर में अलग पड़ता है। इसकी गणना, बुधवार वाला अपवाद और वह गलती जो लगभग सब करते हैं।
पढ़ें →नक्षत्रगुरु श्रवण नक्षत्र पद 4 में: जब बड़ा ग्रह अपने सहज क्षेत्र से बाहर काम करता है
गुरु का श्रवण नक्षत्र के चौथे पद में होना मकर राशि यानी नीच स्थिति दर्शाता है, साथ ही कर्क नवांश से मिलने वाला एक ईमानदार, बिना डर वाला संतु
पढ़ें →नक्षत्रगुरु उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पद 1 में: जब राशि और नवांश दोनों एक ही बात कहें
गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पहले पद में होना वर्गोत्तम स्थिति बनाता है, धनु राशि और धनु नवांश दोनों एक साथ, जो इस सीरीज़ का सबसे मजबूत सं
पढ़ें →नक्षत्रगुरु पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र पद 3 में: वह ताकत जिसे मंच चाहिए
गुरु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तीसरे पद में होना, धनु राशि की स्वाभाविक ताकत और तुला नवांश से आने वाली रिश्तों-केंद्रित उलझन दोनों को दर्शात
पढ़ें →नक्षत्रगुरु मूल नक्षत्र पद 1 में: जड़ तक जाने की सच्ची भूख
गुरु का मूल नक्षत्र के पहले पद में होना, अपनी ही राशि धनु में बैठे गुरु की असली ताकत और उससे जुड़ी गहरी खोजी प्रवृत्ति को दर्शाता है।
पढ़ें →नक्षत्रगुरु ज्येष्ठा नक्षत्र पद 2 में: नेतृत्व जो जिम्मेदारी से आता है, विशेषाधिकार से नहीं
गुरु का ज्येष्ठा नक्षत्र के दूसरे पद में होना क्या दर्शाता है, वृश्चिक राशि और मकर नवांश के संयोग से बनने वाली सधी हुई अधिकार-भावना को समझें
पढ़ें →नक्षत्रबुध स्वाति नक्षत्र पद 2
बुध स्वाति नक्षत्र के दूसरे पद में कन्या राशि और कन्या नवांश दोनों में, यानी वर्गोत्तम स्थिति में बैठता है। जानिए यह दुर्लभ संयोग संतुलन और
पढ़ें →नक्षत्रबुध हस्त नक्षत्र पद 3
बुध हस्त नक्षत्र के तीसरे पद में कन्या राशि और मिथुन नवांश में, यानी अपनी दोनों राशियों में एक साथ बैठता है। जानिए यह असाधारण रूप से मज़बूत
पढ़ें →नक्षत्रबुध उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र पद 1
बुध जब उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र के पहले पद में सिंह राशि और धनु नवांश में होता है, तो आत्मविश्वास और उदारता दोनों साथ चलते हैं। जानिए यह प्लेस
पढ़ें →नक्षत्रबुध पुनर्वसु नक्षत्र पद 4
बुध पुनर्वसु नक्षत्र के चौथे पद में कर्क राशि और कर्क नवांश दोनों में गिरता है। जानिए यह दुर्लभ संयोग बुध के लिए भावनात्मक गहराई और बौद्धिक
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