स्वाति नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर
ज्योतिष · नक्षत्र स्वाति नक्षत्र — स्वामी ग्रह राहु, देवता वायु, प्रतीक मूंगा या हवा में लहलहाता नन्हा पौधा। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और क
पढ़ें →नक्षत्रपुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर
ज्योतिष · नक्षत्र पुनर्वसु नक्षत्र — स्वामी ग्रह बृहस्पति, देवता अदिति, प्रतीक तरकस का तरकश। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसका अ
पढ़ें →नक्षत्रआर्द्रा नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर
ज्योतिष · नक्षत्र आर्द्रा नक्षत्र — स्वामी ग्रह राहु, देवता रुद्र, प्रतीक आंसू की बूंद या हीरा। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसक
पढ़ें →नक्षत्रश्रवण नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर
ज्योतिष · नक्षत्र श्रवण नक्षत्र — स्वामी ग्रह चंद्रमा, देवता विष्णु, प्रतीक कान या तीन पदचिह्न। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसक
पढ़ें →नक्षत्रज्येष्ठा नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर
ज्योतिष · नक्षत्र ज्येष्ठा नक्षत्र — स्वामी ग्रह बुध, देवता इंद्र, प्रतीक बाली या छत्र। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसका असर यह
पढ़ें →नक्षत्रनक्षत्र वृक्ष: 27 नक्षत्रों के पेड़ और उनका मूल स्रोत
सत्ताईस नक्षत्रों की वनस्पति सूची, वह जगह जहाँ से यह आई है, और सूची के भीतर मौजूद एक साफ़ विसंगति।
पढ़ें →नक्षत्रनक्षत्र पद क्या होता है: एक नक्षत्र के चार हिस्से
हर नक्षत्र चार पदों में बँटा है और हर पद ठीक एक नवांश के बराबर है। 108 पद, 108 नवांश, और एक ही अटूट चक्र।
पढ़ें →नक्षत्रनक्षत्र क्या है: 27 नक्षत्रों की पूरी सूची
नक्षत्र निरयण राशिचक्र का 13 अंश 20 कला वाला भाग है। पूरी सूची, हर नक्षत्र का स्वामी, पद, और विंशोत्तरी दशा से इसका सीधा संबंध।
पढ़ें →नक्षत्रनक्षत्र देवता और चिन्ह: पढ़ने की असली कुंजी
नक्षत्र को सिर्फ उसके स्वामी ग्रह से पढ़ना आधी जानकारी है। देवता और चिन्ह अक्सर वह बताते हैं जो स्वामी नहीं बता पाता।
पढ़ें →नक्षत्रगुरु श्रवण नक्षत्र पद 4 में: जब बड़ा ग्रह अपने सहज क्षेत्र से बाहर काम करता है
गुरु का श्रवण नक्षत्र के चौथे पद में होना मकर राशि यानी नीच स्थिति दर्शाता है, साथ ही कर्क नवांश से मिलने वाला एक ईमानदार, बिना डर वाला संतु
पढ़ें →नक्षत्रगुरु उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पद 1 में: जब राशि और नवांश दोनों एक ही बात कहें
गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पहले पद में होना वर्गोत्तम स्थिति बनाता है, धनु राशि और धनु नवांश दोनों एक साथ, जो इस सीरीज़ का सबसे मजबूत सं
पढ़ें →नक्षत्रगुरु पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र पद 3 में: वह ताकत जिसे मंच चाहिए
गुरु का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र के तीसरे पद में होना, धनु राशि की स्वाभाविक ताकत और तुला नवांश से आने वाली रिश्तों-केंद्रित उलझन दोनों को दर्शात
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