ज्योतिष जर्नल

नक्षत्र

सत्ताईस नक्षत्र, उनके स्वामी और पद, और जन्म-नक्षत्र से दशा कैसे तय होती है।

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मंगल पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पद 2, सिंह राशि में वह मंगल जो आराम को भी एक कला बना देता है

पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे पद में सिंह राशि का मंगल आनंद को अनुशासन की तरह जीता है। नवांश गणना, ताकत-कमज़ोरी और दशा-काल की पूरी समझ।

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मंगल आश्लेषा नक्षत्र पद 3, कर्क राशि में नीच का मंगल जो भीतर ही भीतर रणनीति बुनता है

आश्लेषा नक्षत्र के तीसरे पद में मंगल कर्क राशि में नीच का होता है, फिर भी यह कमज़ोरी नहीं, भीतर की रणनीति है। नवांश, दशा-प्रभाव और सच्चाई जा

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मंगल मृगशिरा नक्षत्र पद 1, वृषभ राशि में वह मंगल जो रास्ते के हर दृश्य में रुक जाता है

मंगल जब मृगशिरा नक्षत्र के पहले पद में वृषभ राशि में होता है, तो यह ऊर्जा को खोज और सुंदरता की दिशा में मोड़ देता है। जानें नवांश, दशा-काल औ

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सूर्य शतभिषा पद 2, शत्रु राशि में वरुण के नक्षत्र का अकेलापन

सूर्य जब शतभिषा नक्षत्र के दूसरे पद में कुंभ राशि के 10° से 13°20′ के बीच होता है, वह शनि की राशि में बैठा एक ऐसा सूर्य होता है जो अपन

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सूर्य विशाखा पद 3, नीच राशि में इंद्र-अग्नि के नक्षत्र की जिद

सूर्य जब विशाखा नक्षत्र के तीसरे पद में तुला राशि के 26°40′ से 30° के बीच होता है, वह अपनी नीच राशि में होता है, फिर भी लक्ष्य तक पहुँ

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सूर्य मघा पद 4, सिंह की अपनी राशि में पितरों के नक्षत्र का वजन

सूर्य जब मघा नक्षत्र के चौथे पद में सिंह राशि के 10° से 13°20′ के बीच होता है, वह अपनी ही स्वराशि में सबसे स्थिर स्थिति में होता है। ज

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सूर्य पुष्य पद 1, कर्क में गुरु के नक्षत्र की देखभाल करने वाली ताकत

सूर्य जब पुष्य नक्षत्र के पहले पद में कर्क राशि के 3°20′ से 6°40′ के बीच होता है, तो अहम और देखभाल की भावना एक साथ काम करने लगते

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सूर्य भरणी पद 2, उच्च राशि में यम के नक्षत्र की तपिश

सूर्य जब भरणी नक्षत्र के दूसरे पद में मेष राशि के 16°40′ से 20° के बीच होता है, तो एक ऐसी ऊर्जा बनती है जो उच्च राशि की ताकत और यम देव

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चंद्रमा रेवती नक्षत्र पद 4 में, राशिचक्र का आख़िरी पड़ाव

रेवती नक्षत्र के चौथे पद में चंद्रमा राशिचक्र के आखिरी पद पर बैठता है, जानिए यह प्रतीकात्मक समापन बिंदु भावनात्मक जीवन में क्या दर्शाता है।

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चंद्रमा चित्रा नक्षत्र पद 2 में, अभी भी कन्या राशि में, बुध का दोहरा प्रभाव

चित्रा नक्षत्र के दूसरे पद को अक्सर गलती से तुला राशि का मान लिया जाता है, जबकि यह अभी भी कन्या राशि में है, बुध के दोहरे प्रभाव वाला यह प्ल

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चंद्रमा कृत्तिका नक्षत्र पद 4 में, तेज़ धार वाला मन, शुक्र की नरमी के साथ

कृत्तिका नक्षत्र के चौथे पद में चंद्रमा हो तो अग्नि जैसी तीक्ष्णता शुक्र के वृषभ नवांश से थोड़ी नरम पड़ जाती है, पूरा विश्लेषण पढ़िए।

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चंद्रमा रोहिणी नक्षत्र पद 1 में, वह मन जो सुंदरता को उगते देखना चाहता है

रोहिणी नक्षत्र के पहले पद में चंद्रमा का मतलब है मन का अपनी उच्च राशि के करीब बैठना, जानिए यह भावनात्मक और भौतिक जीवन में कैसे दिखता है।

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