मारक और बाधक: दो अलग बातें जो मिला दी जाती हैं
मारक दूसरे और सातवें भाव के स्वामी हैं, बाधक लग्न की चर, स्थिर या द्विस्वभाव प्रकृति से तय होता है। दोनों अलग ढाँचे हैं।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकराहु और केतु हमेशा वक्री रहते हैं
राहु और केतु की उल्टी चाल दिखावटी नहीं है। यह चंद्र कक्षा के पात बिंदुओं की असली गति है, जो 18.6 वर्ष में एक चक्र पूरा करती है।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकनवांश D9: शादी की कुंडली से कहीं ज़्यादा
नवांश को सिर्फ विवाह की कुंडली मान लेना उसे आधा भी नहीं पढ़ना है। यह हर ग्रह की असली ताकत जाँचने का वर्ग है।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकग्रह दृष्टि: मंगल, गुरु और शनि की विशेष दृष्टि
हर ग्रह सातवें भाव को देखता है. मंगल, गुरु और शनि की अतिरिक्त दृष्टियाँ क्यों हैं, इसका असली कारण दृष्टि-बल के अंश हैं.
पढ़ें →कुंडली और तकनीकअस्त ग्रह: सूर्य के पास आकर ग्रह क्यों कमज़ोर पड़ता है
अस्त की सीमा हर ग्रह के लिए अलग है और वह सीमा उसकी चमक से जुड़ी है। साथ में वह गलत व्याख्या जो सबसे ज़्यादा डराती है।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकवर्गोत्तम: D1 और D9 में एक ही राशि
वर्गोत्तम का अर्थ, नवांश की गणना, और वह डिग्री-पट्टी जो हर राशि के लिए पहले से तय है। साथ में सबसे आम गलत व्याख्या।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकषोडशवर्ग: सोलह वर्ग और उनका असली वज़न
सोलह वर्ग कुंडलियाँ, हर एक का विषय, और विंशोपक बल में उनका वास्तविक भार। साथ में जन्म समय की सटीकता का सीधा गणित।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकदशांश D10: करियर की कुंडली, नौकरी का नाम नहीं
दशांश हर राशि के तीन अंश के दस हिस्सों से बनता है। यह कर्म और स्थिति दिखाता है, किसी पेशे का नाम नहीं बताता।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकआत्मकारक: सबसे ज़्यादा अंश वाला ग्रह
जैमिनी के चर कारक कैसे निकलते हैं, आत्मकारक की गणना में अंश क्यों देखा जाता है राशि नहीं, और यह पराशर के स्थिर कारकों से अलग क्यों है।
पढ़ें →कुंडली और तकनीकसूर्य कभी वक्री क्यों नहीं होता: एक आम गलतफहमी का स्पष्टीकरण
सूर्य और चंद्रमा कभी वक्री नहीं होते, यह ज्योतिष और खगोल विज्ञान दोनों से जुड़ी एक ज़रूरी सच्चाई है।
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