वर्ग कुंडलियों के साथ एक अजीब बात होती है। जैसे ही किसी को पता चलता है कि राशि चार्ट के अलावा और भी चार्ट होते हैं, वह उन्हीं में उतर जाता है। नवांश देखा जाता है, फिर दशांश, फिर कोई कह देता है कि असली चीज़ तो षष्ट्यंश है, और आदमी साठ भागों वाली कुंडली में अपना उत्तर ढूँढ़ने लगता है।
इस पूरी परंपरा में एक बात लगभग हमेशा छूट जाती है। शास्त्र ने केवल वर्ग गिनाए नहीं हैं, उनका वज़न भी दिया है। विंशोपक बल नाम की एक व्यवस्था है जो बताती है कि किस वर्ग की बात कितनी भारी है। और वह व्यवस्था पढ़ते ही आधी उलझन खत्म हो जाती है।
षोडशवर्ग है क्या
वर्ग कुंडली कोई अलग कुंडली नहीं है। वह उसी जन्म समय की, उन्हीं ग्रहों की स्थिति को बारीक करके देखने का तरीका है। राशि तीस अंश की होती है। यदि उसे नौ बराबर भागों में बाँट दें तो हर भाग तीन अंश बीस कला का होगा, और यही नवांश है। साठ भागों में बाँटें तो हर भाग आधा अंश का होगा, और वह षष्ट्यंश है।
यानी हर वर्ग एक आवर्धक काँच है। जैसे जैसे भाग बढ़ते हैं, आवर्धन बढ़ता है। और आवर्धन बढ़ने का एक मूल्य भी होता है, जिस पर मैं आगे विस्तार से आऊँगा।
पाराशर ने जिन सोलह वर्गों की गणना दी है, उन्हें सामूहिक रूप से षोडशवर्ग कहा जाता है। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में आर.
सन्थानम के अंग्रेज़ी अनुवाद के अनुसार इन सोलह वर्गों की गणना-पद्धति अध्याय 6 में दी गई है, जो वहाँ “The Sixteen Divisions Of A Sign” शीर्षक से है, और उनके उपयोग सहित विंशोपक बल यानी बीस अंकों वाले इस बल-विभाजन की गणना अध्याय 7 में समझाई गई है, जिसका शीर्षक “Divisional Consideration” है।
अलग-अलग संस्करणों और अनुवादकों में अध्याय क्रमांक थोड़ा बदल सकता है, इसलिए यह दोनों क्रमांक सन्थानम के अनुवाद के अनुसार ही समझें, किसी सार्वभौमिक संख्या के रूप में नहीं।
सोलह वर्ग और उनके विषय
हर वर्ग का अपना विषय है। सूची इस तरह है।
- D1 राशि, शरीर और समग्र जीवन।
- D2 होरा, धन।
- D3 द्रेष्काण, भाई बहन और पराक्रम।
- D4 चतुर्थांश, स्थायी संपत्ति और घर।
- D7 सप्तांश, संतान।
- D9 नवांश, जीवनसाथी और ग्रह का सामान्य बल।
- D10 दशांश, कर्म और आजीविका।
- D12 द्वादशांश, माता पिता।
- D16 षोडशांश, वाहन और भौतिक सुख।
- D20 विंशांश, उपासना और आध्यात्मिक प्रवृत्ति।
- D24 चतुर्विंशांश, विद्या और सीखने की क्षमता।
- D27 भांश, बलाबल और सहनशक्ति।
- D30 त्रिंशांश, कष्ट और अरिष्ट।
- D40 खवेदांश, मातृकुल से आया शुभ अशुभ।
- D45 अक्षवेदांश, पितृकुल से आया शुभ अशुभ।
- D60 षष्ट्यंश, सब कुछ, सूक्ष्मतम स्तर पर।
एक तकनीकी बात यहीं दर्ज कर देता हूँ। त्रिंशांश बाकी वर्गों की तरह बराबर भागों में नहीं बँटता। उसमें पाँच असमान खंड होते हैं, पाँच, पाँच, आठ, सात और पाँच अंश के, और उनके स्वामी भी पंचांग के सामान्य क्रम से अलग तय होते हैं। यह अपवाद जानना ज़रूरी है, वरना गणना गलत बैठती है।
विंशोपक बल: असली वज़न
अब मुख्य बात। षोडशवर्ग में कुल बीस अंक बाँटे जाते हैं, और हर वर्ग को उसका हिस्सा मिलता है। यही विंशोपक बल है। वितरण इस तरह है।
- D60 षष्ट्यंश, 4 अंक
- D1 राशि, 3.5 अंक
- D9 नवांश, 3 अंक
- D16 षोडशांश, 2 अंक
- D2 होरा, D3 द्रेष्काण और D30 त्रिंशांश, 1 अंक प्रत्येक
- शेष नौ वर्ग, यानी D4, D7, D10, D12, D20, D24, D27, D40 और D45, आधा आधा अंक
जोड़ लीजिए, बीस पूरे होते हैं। अब इस सूची को ध्यान से देखिए, क्योंकि इसमें दो बातें साफ़ लिखी हैं जो आमतौर पर उलटी सुनाई जाती हैं।
पहली, दशांश को केवल आधा अंक मिला है। जो लोग नौकरी का पूरा फैसला दशांश पर टिका देते हैं, वे बीस में से आधे अंक वाली चीज़ पर टिका रहे हैं। दशम भाव की असली पढ़ाई राशि चार्ट में ही होती है, जैसा दशम भाव में गुरु वाले लेख में देखा जा सकता है।
दूसरी, राशि चार्ट और नवांश मिलकर साढ़े छह अंक ले लेते हैं, यानी कुल का लगभग एक तिहाई। बाकी चौदह वर्ग मिलकर उससे कुछ ही ज़्यादा बनाते हैं।
सबसे बड़ी गलतफहमी: षष्ट्यंश सबसे भरोसेमंद चार्ट है
D60 को सबसे ज़्यादा अंक मिले हैं, इसलिए मान लिया जाता है कि वही सबसे भरोसेमंद है। यहीं सबसे बड़ी चूक होती है।
विंशोपक बल यह बताता है कि किसी ग्रह की समग्र शक्ति में कौन सा वर्ग कितना योगदान देता है। यह इस बात की गारंटी नहीं देता कि आपकी कुंडली में वह वर्ग सही बना है। और षष्ट्यंश ठीक वही वर्ग है जो जन्म समय की छोटी सी गलती से टूट जाता है।
जन्म समय की सटीकता का सीधा गणित
यह गणित हर किसी को एक बार देख लेना चाहिए। लग्न औसतन चौबीस घंटे में तीन सौ साठ अंश घूमता है, यानी लगभग एक अंश हर चार मिनट में।
- नवांश का एक भाग तीन अंश बीस कला का होता है। इतना चलने में लग्न को औसतन लगभग तेरह मिनट लगते हैं। यानी तेरह मिनट की गलती नवांश लग्न बदल देती है।
- षष्ट्यंश का एक भाग आधे अंश का होता है। इतना चलने में लग्न को औसतन लगभग दो मिनट लगते हैं। यानी दो मिनट की गलती षष्ट्यंश लग्न बदल देती है।
यह औसत है और इसे औसत ही समझा जाए। लग्न की गति अक्षांश और राशि के अनुसार बहुत बदलती है, कुछ राशियाँ बहुत तेज़ उदय होती हैं और कुछ बहुत धीमी। फिर भी क्रम वही रहता है।
अब इसे उस वास्तविकता से मिलाइए जिसमें अधिकतर जन्म समय दर्ज होते हैं। घड़ी देखकर, आसपास वाले की याद से, अस्पताल के रजिस्टर में निकटतम पाँच या दस मिनट पर गोल करके। ऐसे समय पर बना षष्ट्यंश एक बहुत सुंदर, बहुत सूक्ष्म और बहुत अस्थिर चीज़ है।
जो कम कहा जाता है: वर्ग राशि चार्ट को पलटते नहीं
यह वह बात है जो सबसे कम कही जाती है और सबसे ज़्यादा काम की है। कोई वर्ग कुंडली राशि चार्ट का फैसला उलट नहीं सकती।
वर्ग यह बताते हैं कि राशि चार्ट में जो वादा दिख रहा है वह कितना ठोस है। यदि राशि चार्ट में सप्तम भाव पर कोई ठोस स्थिति है ही नहीं, तो नवांश में कुछ भी हो, वह अपने आप कोई नई स्थिति नहीं बना देता।
वर्ग पुष्टि करते हैं, बढ़ाते या घटाते हैं। शुरुआत हमेशा राशि चार्ट से होती है, और उसका साढ़े तीन अंक वाला वज़न यही कह रहा है।
व्यवहार में मैं क्या करता हूँ
मेरा क्रम सीधा है और इसे आप भी अपना सकते हैं।
- राशि चार्ट पूरा पढ़िए। भाव, स्वामी, दृष्टि, युति।
- नवांश से उसकी पुष्टि कीजिए, खासकर ग्रह के बल और वैवाहिक विषयों के लिए।
- जिस एक विषय पर सवाल है, केवल उसका वर्ग खोलिए। संतान का सवाल हो तो सप्तांश, कर्म का हो तो दशांश।
- जब तक जन्म समय मिनट तक भरोसेमंद न हो, D24 से आगे के वर्गों पर कोई निष्कर्ष मत टिकाइए।
- दशा से मिलाइए। विंशोत्तरी दशा बताती है कि कौन सा वादा कब सक्रिय होगा, और चंद्र महादशा जैसी अवधियाँ उसी क्रम का हिस्सा हैं।
और अंत में वही बात जो इस साइट पर हर जगह लागू है। यह गणना का औज़ार है। कोई वर्ग कुंडली किसी परिणाम की गारंटी नहीं देती, और किसी वर्ग में कुछ देखकर डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। यदि गोचर का ढाँचा भी साथ देखना हो तो साढ़ेसाती वाला लेख उसी क्रम में पढ़ा जा सकता है।
षोडशवर्ग में कितने वर्ग होते हैं और उनका कुल बल कितना है?
सोलह वर्ग होते हैं, D1 से लेकर D60 तक, और विंशोपक बल में उनके बीच कुल बीस अंक बाँटे जाते हैं। सबसे ज़्यादा चार अंक D60 को, साढ़े तीन D1 को और तीन D9 को मिलते हैं।
क्या षष्ट्यंश सबसे महत्वपूर्ण चार्ट है?
उसे सबसे ज़्यादा विंशोपक अंक मिलते हैं, फिर भी वह सबसे भरोसेमंद नहीं होता। उसका एक भाग आधे अंश का होता है, जिसे पार करने में लग्न को औसतन लगभग दो मिनट लगते हैं। इसलिए जन्म समय में दो मिनट की गलती भी षष्ट्यंश बदल देती है।
दशांश को इतना कम वज़न क्यों मिला है?
विंशोपक व्यवस्था में दशांश को आधा अंक मिलता है। इसका अर्थ यह है कि आजीविका का मुख्य निर्णय राशि चार्ट के दशम भाव और उसके स्वामी से निकलता है, और दशांश उसकी पुष्टि या बारीकी के लिए है।
त्रिंशांश बाकी वर्गों से अलग क्यों है?
क्योंकि उसमें राशि बराबर भागों में नहीं बँटती। पाँच असमान खंड होते हैं, पाँच, पाँच, आठ, सात और पाँच अंश के, और उनके स्वामी सामान्य क्रम से अलग तय होते हैं। इस अपवाद को छोड़ देने पर गणना गलत बैठ जाती है।
जन्म समय कितना सटीक होना चाहिए?
नवांश के लिए मिनटों का स्तर पर्याप्त होता है, क्योंकि नवांश लग्न औसतन लगभग तेरह मिनट में बदलता है। D24 से आगे के वर्गों के लिए एक या दो मिनट की सटीकता चाहिए, जो अधिकतर दर्ज जन्म समय में उपलब्ध नहीं होती।
क्या कोई वर्ग कुंडली राशि चार्ट का फल उलट सकती है?
नहीं। वर्ग यह बताते हैं कि राशि चार्ट में दिख रही स्थिति कितनी ठोस है। जो वादा राशि चार्ट में है ही नहीं, उसे कोई वर्ग अपने आप खड़ा नहीं करता। राशि चार्ट का साढ़े तीन अंक वाला भार यही बात कहता है।

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