विंशोत्तरी दशा: नौ महादशाएँ और उनकी गणना

ज्योतिष · विंशोत्तरी दशा

विंशोत्तरी दशा — 120 वर्ष के चक्र में नौ ग्रहों की महादशाएँ, जन्म-नक्षत्र से तय होती हैं। यहाँ पूरा ढाँचा है, और हर महादशा का लिंक।

Karma Jyotiṣaगणना आधारित लेख≈ 5 मिनट

विंशोत्तरी दशा पद्धति सबसे अधिक प्रयोग होने वाली दशा प्रणाली है। यह मानती है कि पूरा जीवन-चक्र 120 वर्षों का है, जो नौ ग्रहों के बीच निश्चित अनुपात में बँटा है — और यह शुरू कहाँ से होगा, यह तय होता है जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र में था, उससे।

01नौ महादशाएँ

विंशोत्तरी चक्र · 120 वर्ष
ग्रह अवधि
केतु 7 वर्ष
शुक्र 20 वर्ष
सूर्य 6 वर्ष
चंद्र 10 वर्ष
मंगल 7 वर्ष
राहु 18 वर्ष
गुरु 16 वर्ष
शनि 19 वर्ष
बुध 17 वर्ष

प्रत्येक महादशा अपने नौ अंतर्दशा उप-काल में बँटती है — विस्तृत, गणना-सहित समय-रेखा हर ग्रह के अपने पेज पर मौजूद है।

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02अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

विंशोत्तरी दशा क्या है?

यह सबसे प्रचलित दशा प्रणाली है, जो जन्म-नक्षत्र के आधार पर 120 वर्ष के चक्र को नौ ग्रहों की महादशाओं में बाँटती है।

मेरी दशा कैसे शुरू होती है, यह कैसे तय होता है?

जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में था, उसका स्वामी ग्रह ही पहली महादशा का स्वामी होता है — और उस नक्षत्र में चंद्र कितना आगे बढ़ चुका था, उससे शेष अवधि तय होती है।

Aditya Sharma

लेखक

Aditya Sharma

मैंने Karma Jyotisha इसलिए बनाया क्योंकि ज्यादातर “AI ज्योतिष” साइट्स बस अंदाजा लगाते हैं। यह साइट वास्तविक विंशोत्तरी दशा और नक्षत्र गणना महर्षि पराशर के BPHS से करती है — गणना की गई, अंदाजा नहीं। मैं एक इंजीनियर हूं, पेशेवर ज्योतिषी नहीं — इसलिए इसे एक गणना-उपकरण मानता हूं, भविष्यवाणी नहीं — और यह हर पेज पर साफ़ लिखता हूं।