उच्च और नीच राशि: सही अंश कौन सा है
सातों ग्रहों की परम उच्च डिग्री, नीच बिंदु का नियम, और वह गणना जिससे उच्च बल घटता बढ़ता है।
पढ़ें →योग और दोषगण कूट: देव, मनुष्य, राक्षस का असली मतलब
राक्षस गण का मतलब बुरा इंसान नहीं होता। यह स्वभाव की एक श्रेणी है और छत्तीस गुणों में इसका हिस्सा सिर्फ छह का है।
पढ़ें →योग और दोषयोनि कूट: चौदह योनि और चार अंक
योनि कूट की पूरी तालिका, सात वध जोड़ियाँ, और वह अकेली योनि जिसका कोई जोड़ा ही नहीं है।
पढ़ें →योग और दोषगज केसरी योग: चंद्रमा से केंद्र, लग्न से नहीं
गज केसरी योग की शर्त गुरु का चंद्रमा से केंद्र में होना है। लग्न से केंद्र देखकर इसे बनाना सबसे आम गलती है।
पढ़ें →योग और दोषपंच महापुरुष योग: पांच योग और उनकी सख्त शर्तें
रुचक, भद्र, हंस, मालव्य और शश। पाँच योग, दो सख्त शर्तें, और वे भंग स्थितियाँ जिन्हें ज़्यादातर लेख छोड़ देते हैं।
पढ़ें →योग और दोषनीच भंग राज योग: भंग की शर्तें साफ-साफ
नीच भंग की शास्त्रीय शर्तें क्या हैं, भंग होने पर असल में क्या बदलता है, और राज योग शब्द कहाँ से आ गया।
पढ़ें →योग और दोषनाड़ी दोष: आठ अंक और उनके अपवाद
नाड़ी कूट के आठ अंक गुण मिलान का सबसे भारी हिस्सा हैं। शास्त्र में परिहार भी दिए गए हैं, जिन्हें ज़्यादातर सूचियाँ छोड़ देती हैं।
पढ़ें →योग और दोषमंगल दोष: नियम, अपवाद और जहां बात बढ़ा दी जाती है
मंगल दोष का असली नियम, अपवादों की पूरी सूची, और वह गणित जो बताता है कि लगभग हर पाँचवीं-छठी कुंडली इस श्रेणी में आ जाती है।
पढ़ें →योग और दोषकाल सर्प योग: शास्त्र में क्या लिखा है और क्या नहीं
काल सर्प योग का नाम शास्त्रीय ग्रंथों की योग सूची में नहीं मिलता। जो ज्यामिति असली है, वह क्या कहती है और डर क्यों बेचा जाता है।
पढ़ें →योग और दोषगुण मिलान: 36 गुण किस कूट से कितने आते हैं
आठ कूटों में 36 अंक बराबर नहीं बँटे। भकूट और नाड़ी अकेले 15 अंक ले जाते हैं, इसलिए एक ही स्कोर के दो बिल्कुल अलग मतलब हो सकते हैं।
पढ़ें →योग और दोषभकूट दोष: राशि की दूरी और कब यह कटता है
भकूट छत्तीस में से सात अंक का कूट है। कौन सी राशि दूरियाँ शून्य देती हैं, परिहार के शास्त्रीय नियम, और वह गलती जो रिश्ते तुड़वा देती है।
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