बुध आर्द्रा नक्षत्र पद 2
बुध जब आर्द्रा नक्षत्र के दूसरे पद में मिथुन राशि और मकर नवांश में बैठता है, तो सोच बहुत तेज़ पर बेचैन हो जाती है। जानिए यह प्लेसमेंट क्या द
पढ़ें →नक्षत्रमंगल उत्तराभाद्रपद नक्षत्र पद 4, मीन राशि में वह मंगल जो शांत गहराई से बड़े काम करता है
उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के चौथे पद में मीन राशि का मंगल शांत गहराई से काम करता है। नवांश गणना, ताकत-कमज़ोरी और दशा-काल की पूरी व्याख्या।
पढ़ें →नक्षत्रमंगल अनुराधा नक्षत्र पद 1, वृश्चिक राशि में स्वराशि का मंगल जो टीम बनाकर जीतना जानता है
अनुराधा नक्षत्र के पहले पद में वृश्चिक राशि का स्वराशि मंगल अकेले नहीं, टीम बनाकर जीतता है। नवांश, दशा-प्रभाव और असली स्वभाव जानें।
पढ़ें →नक्षत्रमंगल पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र पद 2, सिंह राशि में वह मंगल जो आराम को भी एक कला बना देता है
पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र के दूसरे पद में सिंह राशि का मंगल आनंद को अनुशासन की तरह जीता है। नवांश गणना, ताकत-कमज़ोरी और दशा-काल की पूरी समझ।
पढ़ें →नक्षत्रमंगल आश्लेषा नक्षत्र पद 3, कर्क राशि में नीच का मंगल जो भीतर ही भीतर रणनीति बुनता है
आश्लेषा नक्षत्र के तीसरे पद में मंगल कर्क राशि में नीच का होता है, फिर भी यह कमज़ोरी नहीं, भीतर की रणनीति है। नवांश, दशा-प्रभाव और सच्चाई जा
पढ़ें →नक्षत्रमंगल मृगशिरा नक्षत्र पद 1, वृषभ राशि में वह मंगल जो रास्ते के हर दृश्य में रुक जाता है
मंगल जब मृगशिरा नक्षत्र के पहले पद में वृषभ राशि में होता है, तो यह ऊर्जा को खोज और सुंदरता की दिशा में मोड़ देता है। जानें नवांश, दशा-काल औ
पढ़ें →नक्षत्रसूर्य शतभिषा पद 2, शत्रु राशि में वरुण के नक्षत्र का अकेलापन
सूर्य जब शतभिषा नक्षत्र के दूसरे पद में कुंभ राशि के 10° से 13°20′ के बीच होता है, वह शनि की राशि में बैठा एक ऐसा सूर्य होता है जो अपन
पढ़ें →नक्षत्रसूर्य विशाखा पद 3, नीच राशि में इंद्र-अग्नि के नक्षत्र की जिद
सूर्य जब विशाखा नक्षत्र के तीसरे पद में तुला राशि के 26°40′ से 30° के बीच होता है, वह अपनी नीच राशि में होता है, फिर भी लक्ष्य तक पहुँ
पढ़ें →नक्षत्रसूर्य मघा पद 4, सिंह की अपनी राशि में पितरों के नक्षत्र का वजन
सूर्य जब मघा नक्षत्र के चौथे पद में सिंह राशि के 10° से 13°20′ के बीच होता है, वह अपनी ही स्वराशि में सबसे स्थिर स्थिति में होता है। ज
पढ़ें →नक्षत्रसूर्य पुष्य पद 1, कर्क में गुरु के नक्षत्र की देखभाल करने वाली ताकत
सूर्य जब पुष्य नक्षत्र के पहले पद में कर्क राशि के 3°20′ से 6°40′ के बीच होता है, तो अहम और देखभाल की भावना एक साथ काम करने लगते
पढ़ें →नक्षत्रसूर्य भरणी पद 2, उच्च राशि में यम के नक्षत्र की तपिश
सूर्य जब भरणी नक्षत्र के दूसरे पद में मेष राशि के 16°40′ से 20° के बीच होता है, तो एक ऐसी ऊर्जा बनती है जो उच्च राशि की ताकत और यम देव
पढ़ें →नक्षत्रचंद्रमा रेवती नक्षत्र पद 4 में, राशिचक्र का आख़िरी पड़ाव
रेवती नक्षत्र के चौथे पद में चंद्रमा राशिचक्र के आखिरी पद पर बैठता है, जानिए यह प्रतीकात्मक समापन बिंदु भावनात्मक जीवन में क्या दर्शाता है।
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