ज्येष्ठा नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर

ज्योतिष · नक्षत्र

ज्येष्ठा नक्षत्र — स्वामी ग्रह बुध, देवता इंद्र, प्रतीक बाली या छत्र। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसका असर यहाँ पढ़ें।

Karma Jyotiṣaशास्त्रीय प्रोफ़ाइल≈ 6 मिनट

ज्येष्ठा नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर

ज्येष्ठा · एक नज़र में

स्वामी ग्रह
बुध
देवता
इंद्र
प्रतीक
बाली / छत्र
गण
राक्षस
नाड़ी
आदि
योनि
हिरण
राशि विस्तार
वृश्चिक 16°40′–30°00′

बड़े भाई-बहन जैसा दायित्व। इंद्र का यह नक्षत्र वरिष्ठता, सुरक्षा और छिपी हुई शक्ति का प्रतीक है — सक्षम, ज़िम्मेदार, आत्मसम्मानी, अक्सर वह बोझ उठाने वाला जिसे दूसरे नहीं उठा पाते।

01ज्येष्ठा नक्षत्र क्या दर्शाता है

हर नक्षत्र मन (चंद्रमा) को अपने देवता की छाप देता है। इंद्र की छत्रछाया और बुध के अनुशासन में, ज्येष्ठा में ऊपर बताए गुण झलकते हैं — चंद्रमा जितना बलवान और सम्मानित होगा उतने ही ये गुण निखरेंगे, पीड़ित चंद्रमा में उतने ही दबे रहेंगे। बाली या छत्र वाली छवि याद रखने लायक है: यह नक्षत्र चुपचाप वही करता रहता है, हमेशा।

यह किसी के चरित्र पर फ़ैसला नहीं है। यह एक जन्म-नक्षत्र की शास्त्रीय प्रवृत्ति भर है, जिसका अर्थ पूरी कुंडली के साथ पढ़ने पर ही बनता है।

02कुंडली मिलान में महत्व

गुण मिलान के लिए ज्येष्ठा का राक्षस गण (स्वभाव), आदि नाड़ी (शारीरिक प्रकृति) और हिरण योनि (सहज प्रवृत्ति) देखी जाती है। परंपरा में साथी का गण मेल खाना अच्छा माना गया है, पर सबसे ज़रूरी यह है कि दोनों की नाड़ी अलग हो — समान नाड़ी वाले जोड़े को उस कूट में शून्य अंक मिलते हैं और शास्त्र इसे टालने को कहता है।

03चार पद और उनका असर

हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और चार पदों में बंटा होता है, हर पद 3°20′ का। प्रत्येक पद एक नवांश राशि से जुड़ा होता है, और उस नवांश के स्वामी ग्रह की छाप उस पद पर हल्की-सी अतिरिक्त परत जोड़ देती है — यही कारण है कि एक ही नक्षत्र में जन्मे दो लोग थोड़े अलग स्वभाव के दिख सकते हैं।

नामकरण की परंपरा में भी हर पद का अपना अक्षर-समूह तय है, जो बच्चे का नाम रखते समय काम आता है।

ज्येष्ठा वृश्चिक राशि के 16°40′ से 30°00′ तक फैला है, इसलिए इसके चारों पद वृश्चिक के नवांश-पद 6, 7, 8 और 9 पर बैठते हैं।

गणना करने पर तालिका यह बनती है — पद 1: नवांश धनु, नामकरण-अक्षर ‘नो’; पद 2: नवांश मकर, नामकरण-अक्षर ‘या’; पद 3: नवांश कुंभ, नामकरण-अक्षर ‘यी’; पद 4: नवांश मीन, नामकरण-अक्षर ‘यू’।

यह नामकरण-अक्षर तालिका मुहूर्त-ग्रंथों की प्रचलित नामकरण-सूची से हैं; कुछ पंचांगों में इक्का-दुक्का अक्षर का पाठभेद मिल सकता है, इसलिए नामकरण से पहले अपने पंडित या पंचांग से एक बार मिला लेना बेहतर है। अपनी सटीक जन्म-कुंडली से अपना पद जानने के लिए नीचे दिया गया मुफ़्त टूल इस्तेमाल करें।

अपनी नक्षत्र कुंडली पढ़ें

अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान दें, Karma Jyotiṣa आपका सटीक चंद्र-नक्षत्र, उसका पद और कुंडली पर असर मुफ़्त में निकाल देगा।

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04अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन-सा है?

ज्येष्ठा का स्वामी ग्रह विंशोत्तरी प्रणाली में बुध है — यानी ज्येष्ठा में जन्मे चंद्रमा की महादशा बुध से शुरू होती है। इसके अधिष्ठाता देवता इंद्र हैं।

ज्येष्ठा का गण और नाड़ी क्या है?

ज्येष्ठा राक्षस गण, आदि नाड़ी और हिरण योनि का नक्षत्र है। ये तीनों गुण मिलान का बड़ा हिस्सा तय करते हैं — समान नाड़ी वाले जोड़े को शास्त्र में टाला जाता है।

ज्येष्ठा नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?

बड़े भाई-बहन जैसा दायित्व। इंद्र का यह नक्षत्र वरिष्ठता, सुरक्षा और छिपी शक्ति दर्शाता है — सक्षम, ज़िम्मेदार, अक्सर वह बोझ उठाने वाला जिसे दूसरे नहीं उठा पाते। असली स्वभाव पद, चंद्रमा की स्थिति और पूरी कुंडली पर निर्भर करता है — गणना ही इसे सही-सही बताती है।

अपना नक्षत्र कैसे पता करें?

आपके जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति ही आपका नक्षत्र और पद तय करती है। Karma Jyotiṣa इसे आपकी जन्म तारीख़, समय और स्थान से मुफ़्त में निकाल देता है।

विस्तृत नक्षत्र-परिचय (हिंदी में): नक्षत्र क्या है — 27 नक्षत्र। अंग्रेज़ी में पूरा प्रोफ़ाइल: Jyeshtha Nakshatra।

Aditya Sharma

लेखक

Aditya Sharma

मैंने Karma Jyotisha इसलिए बनाया क्योंकि ज्यादातर “AI ज्योतिष” साइट्स बस अंदाजा लगाते हैं। यह साइट वास्तविक विंशोत्तरी दशा और नक्षत्र गणना महर्षि पराशर के BPHS से करती है — गणना की गई, अंदाजा नहीं। मैं एक इंजीनियर हूं, पेशेवर ज्योतिषी नहीं — इसलिए इसे एक गणना-उपकरण मानता हूं, भविष्यवाणी नहीं — और यह हर पेज पर साफ़ लिखता हूं।

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