ज्योतिष · नक्षत्र
स्वाति नक्षत्र — स्वामी ग्रह राहु, देवता वायु, प्रतीक मूंगा या हवा में लहलहाता नन्हा पौधा। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसका असर यहाँ पढ़ें।
स्वाति · एक नज़र में
- स्वामी ग्रह
- राहु
- देवता
- वायु
- प्रतीक
- मूंगा / हवा में लहलहाता नन्हा
- गण
- देव
- नाड़ी
- अंत्य
- योनि
- भैंस
- राशि विस्तार
- तुला 6°40′–20°00′
हवा जितना स्वतंत्र। वायु का यह नक्षत्र स्वावलंबन, कूटनीति और व्यापार का प्रतीक है — लचीला, आज़ादी-प्रेमी, संतुलित पर बेचैन, झुकता जरूर पर टूटता नहीं।
01स्वाति नक्षत्र क्या दर्शाता है
हर नक्षत्र मन (चंद्रमा) को अपने देवता की छाप देता है। वायु और राहु के अनुशासन में, स्वाति में ऊपर बताए गुण झलकते हैं — चंद्रमा जितना बलवान होगा उतने ही ये गुण निखरेंगे, पीड़ित चंद्रमा में अस्थिरता और बेचैनी ज्यादा दिखेंगे। मूंगा या हवा में लहलहाता नन्हा वाली छवि याद रखने लायक है: यह नक्षत्र मुड़कर भी नहीं टूटता।
यह किसी के चरित्र पर फ़ैसला नहीं है। यह एक जन्म-नक्षत्र की शास्त्रीय प्रवृत्ति भर है, जिसका अर्थ पूरी कुंडली के साथ पढ़ने पर ही बनता है।
02कुंडली मिलान में महत्व
गुण मिलान के लिए स्वाति का देव गण (स्वभाव), अंत्य नाड़ी (शारीरिक प्रकृति) और भैंस योनि (सहज प्रवृत्ति) देखी जाती है। सबसे ज़रूरी यह है कि दोनों की नाड़ी अलग हो — समान नाड़ी वाले जोड़े को उस कूट में शून्य अंक मिलते हैं और शास्त्र इसे टालने को कहता है।
03चार पद और उनका असर
हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और चार पदों में बंटा होता है, हर पद 3°20′ का। प्रत्येक पद एक नवांश राशि से जुड़ा होता है, और उस नवांश के स्वामी ग्रह की छाप उस पद पर हल्की-सी अतिरिक्त परत जोड़ देती है। नामकरण की परंपरा में भी हर पद का अपना अक्षर-समूह तय है।
स्वाति तुला राशि के 6°40′ से 20°00′ तक फैला है, इसलिए इसके चारों पद तुला के नवांश-पद 3, 4, 5 और 6 पर बैठते हैं।
गणना करने पर तालिका यह बनती है — पद 1: नवांश धनु, नामकरण-अक्षर ‘रू’; पद 2: नवांश मकर, नामकरण-अक्षर ‘रे’; पद 3: नवांश कुंभ, नामकरण-अक्षर ‘रो’; पद 4: नवांश मीन, नामकरण-अक्षर ‘ता’।
यह नामकरण-अक्षर तालिका मुहूर्त-ग्रंथों की प्रचलित नामकरण-सूची से हैं; कुछ पंचांगों में इक्का-दुक्का अक्षर का पाठभेद मिल सकता है, इसलिए नामकरण से पहले अपने पंडित या पंचांग से एक बार मिला लेना बेहतर है। अपनी सटीक जन्म-कुंडली से अपना पद जानने के लिए नीचे दिया गया मुफ़्त टूल इस्तेमाल करें।
अपनी नक्षत्र कुंडली पढ़ें
अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान दें, Karma Jyotiṣa आपका सटीक चंद्र-नक्षत्र, उसका पद और कुंडली पर असर मुफ़्त में निकाल देगा।
04अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन-सा है?
स्वाति का स्वामी ग्रह विंशोत्तरी प्रणाली में राहु है। इसके अधिष्ठाता देवता वायु हैं।
स्वाति का गण और नाड़ी क्या है?
स्वाति देव गण, अंत्य नाड़ी और भैंस योनि का नक्षत्र है। ये तीनों गुण मिलान का बड़ा हिस्सा तय करते हैं।
स्वाति नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?
हवा जितना स्वतंत्र। स्वावलंबन, कूटनीति और व्यापार का प्रतीक — लचीला, आज़ादी-प्रेमी, संतुलित पर बेचैन। असली स्वभाव पद, राहु की स्थिति और पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।
अपना नक्षत्र कैसे पता करें?
आपके जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति ही आपका नक्षत्र और पद तय करती है। Karma Jyotiṣa इसे आपकी जन्म तारीख़, समय और स्थान से मुफ़्त में निकाल देता है।
विस्तृत नक्षत्र-परिचय (हिंदी में): नक्षत्र क्या है — 27 नक्षत्र। अंग्रेज़ी में पूरा प्रोफ़ाइल: Swati Nakshatra।

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