पुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर

ज्योतिष · नक्षत्र

पुनर्वसु नक्षत्र — स्वामी ग्रह बृहस्पति, देवता अदिति, प्रतीक तरकस का तरकश। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसका असर यहाँ पढ़ें।

Karma Jyotiṣaशास्त्रीय प्रोफ़ाइल≈ 6 मिनट

पुनर्वसु नक्षत्र: स्वामी ग्रह, देवता और चारों पदों का असर

पुनर्वसु · एक नज़र में

स्वामी ग्रह
बृहस्पति
देवता
अदिति
प्रतीक
तरकस का तरकश
गण
देव
नाड़ी
आदि
योनि
बिल्ली
राशि विस्तार
मिथुन 20°00′–कर्क 3°20′

लौटना और नवनिर्माण। अदिति का असीम आकाश — आशावादी, उदार, दार्शनिक। पुनर्वसु हार के बाद हमेशा प्रकाश की ओर लौटता है; यह फिर से संवरता है, माफ़ करता है और नए सिरे से शुरूआत करता है।

01पुनर्वसु नक्षत्र क्या दर्शाता है

हर नक्षत्र मन (चंद्रमा) को अपने देवता की छाप देता है। अदिति और बृहस्पति के अनुशासन में, पुनर्वसु में ऊपर बताए गुण झलकते हैं — चंद्रमा जितना बलवान होगा उतने ही ये गुण निखरेंगे, पीड़ित चंद्रमा में अस्थिरता और बिखराव ज्यादा दिखेंगे। तरकस का तरकश वाली छवि याद रखने लायक है: यह नक्षत्र हमेशा नए अवसर और नई शुरुआत लेकर आता है।

यह किसी के चरित्र पर फ़ैसला नहीं है। यह एक जन्म-नक्षत्र की शास्त्रीय प्रवृत्ति भर है, जिसका अर्थ पूरी कुंडली के साथ पढ़ने पर ही बनता है।

02कुंडली मिलान में महत्व

गुण मिलान के लिए पुनर्वसु का देव गण (स्वभाव), आदि नाड़ी (शारीरिक प्रकृति) और बिल्ली योनि (सहज प्रवृत्ति) देखी जाती है। सबसे ज़रूरी यह है कि दोनों की नाड़ी अलग हो — समान नाड़ी वाले जोड़े को उस कूट में शून्य अंक मिलते हैं और शास्त्र इसे टालने को कहता है।

03चार पद और उनका असर

हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और चार पदों में बंटा होता है, हर पद 3°20′ का। प्रत्येक पद एक नवांश राशि से जुड़ा होता है, और उस नवांश के स्वामी ग्रह की छाप उस पद पर हल्की-सी अतिरिक्त परत जोड़ देती है। नामकरण की परंपरा में भी हर पद का अपना अक्षर-समूह तय है।

पुनर्वसु मिथुन राशि के 20°00′ से शुरू होकर कर्क राशि के 3°20′ तक फैला है, इसलिए इसके चारों पद मिथुन के नवांश-पद 7, 8, 9 और कर्क के नवांश-पद 1 पर बैठते हैं।

गणना करने पर तालिका यह बनती है — पद 1: नवांश मेष, नामकरण-अक्षर ‘के’; पद 2: नवांश वृषभ, नामकरण-अक्षर ‘को’; पद 3: नवांश मिथुन, नामकरण-अक्षर ‘हा’; पद 4: नवांश कर्क, नामकरण-अक्षर ‘ही’।

यह नामकरण-अक्षर तालिका मुहूर्त-ग्रंथों की प्रचलित नामकरण-सूची से हैं; कुछ पंचांगों में इक्का-दुक्का अक्षर का पाठभेद मिल सकता है, इसलिए नामकरण से पहले अपने पंडित या पंचांग से एक बार मिला लेना बेहतर है। अपनी सटीक जन्म-कुंडली से अपना पद जानने के लिए नीचे दिया गया मुफ़्त टूल इस्तेमाल करें।

अपनी नक्षत्र कुंडली पढ़ें

अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान दें, Karma Jyotiṣa आपका सटीक चंद्र-नक्षत्र, उसका पद और कुंडली पर असर मुफ़्त में निकाल देगा।

मुफ़्त रीडिंग पाएं →

04अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पुनर्वसु नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन-सा है?

पुनर्वसु का स्वामी ग्रह विंशोत्तरी प्रणाली में बृहस्पति है। इसके अधिष्ठाता देवता अदिति हैं।

पुनर्वसु का गण और नाड़ी क्या है?

पुनर्वसु देव गण, आदि नाड़ी और बिल्ली योनि का नक्षत्र है। ये तीनों गुण मिलान का बड़ा हिस्सा तय करते हैं।

पुनर्वसु नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?

लौटना और नवनिर्माण। अदिति का असीम आकाश — आशावादी, उदार, दार्शनिक। असली स्वभाव पद, बृहस्पति की स्थिति और पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।

अपना नक्षत्र कैसे पता करें?

आपके जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति ही आपका नक्षत्र और पद तय करती है। Karma Jyotiṣa इसे आपकी जन्म तारीख़, समय और स्थान से मुफ़्त में निकाल देता है।

विस्तृत नक्षत्र-परिचय (हिंदी में): नक्षत्र क्या है — 27 नक्षत्र। अंग्रेज़ी में पूरा प्रोफ़ाइल: Punarvasu Nakshatra।

Aditya Sharma

लेखक

Aditya Sharma

मैंने Karma Jyotisha इसलिए बनाया क्योंकि ज्यादातर “AI ज्योतिष” साइट्स बस अंदाजा लगाते हैं। यह साइट वास्तविक विंशोत्तरी दशा और नक्षत्र गणना महर्षि पराशर के BPHS से करती है — गणना की गई, अंदाजा नहीं। मैं एक इंजीनियर हूं, पेशेवर ज्योतिषी नहीं — इसलिए इसे एक गणना-उपकरण मानता हूं, भविष्यवाणी नहीं — और यह हर पेज पर साफ़ लिखता हूं।

टिप्पणियाँ

अभी कोई टिप्पणी नहीं। पहली आपकी हो सकती है।

टिप्पणी लिखें

प्रकाशित होने से पहले समीक्षा की जाती है। आपका ईमेल कभी प्रकाशित नहीं होता।