ज्योतिष · नक्षत्र
श्रवण नक्षत्र — स्वामी ग्रह चंद्रमा, देवता विष्णु, प्रतीक कान या तीन पदचिह्न। इसका शास्त्रीय स्वभाव, गुण और कुंडली में इसका असर यहाँ पढ़ें।
श्रवण · एक नज़र में
- स्वामी ग्रह
- चंद्रमा
- देवता
- विष्णु
- प्रतीक
- कान / तीन पदचिह्न
- गण
- देव
- नाड़ी
- अंत्य
- योनि
- वानर
- राशि विस्तार
- मकर 10°00′–23°20′
सुनने वाला। विष्णु का यह नक्षत्र सीखने, जुड़ने और प्रतिष्ठा का प्रतीक है — समझदार, ग्रहणशील, ज्ञान और परंपरा का रखवाला, जो सुनकर और संजोकर रखकर आगे बढ़ता है।
01श्रवण नक्षत्र क्या दर्शाता है
हर नक्षत्र मन (चंद्रमा) को अपने देवता की छाप देता है। विष्णु और चंद्रमा के अनुशासन में, श्रवण में ऊपर बताए गुण झलकते हैं — चंद्रमा जितना बलवान और सम्मानित होगा उतने ही ये गुण निखरेंगे, पीड़ित चंद्रमा में उतने ही दबे रहेंगे। कान या तीन पदचिह्न वाली छवि याद रखने लायक है: यह नक्षत्र चुपचाप सुनता, सीखता और संजोकर रखता रहता है।
यह किसी के चरित्र पर फ़ैसला नहीं है। यह एक जन्म-नक्षत्र की शास्त्रीय प्रवृत्ति भर है, जिसका अर्थ पूरी कुंडली के साथ पढ़ने पर ही बनता है।
02कुंडली मिलान में महत्व
गुण मिलान के लिए श्रवण का देव गण (स्वभाव), अंत्य नाड़ी (शारीरिक प्रकृति) और वानर योनि (सहज प्रवृत्ति) देखी जाती है। सबसे ज़रूरी यह है कि दोनों की नाड़ी अलग हो — समान नाड़ी वाले जोड़े को उस कूट में शून्य अंक मिलते हैं और शास्त्र इसे टालने को कहता है।
03चार पद और उनका असर
हर नक्षत्र 13°20′ का होता है और चार पदों में बंटा होता है, हर पद 3°20′ का। प्रत्येक पद एक नवांश राशि से जुड़ा होता है, और उस नवांश के स्वामी ग्रह की छाप उस पद पर हल्की-सी अतिरिक्त परत जोड़ देती है। नामकरण की परंपरा में भी हर पद का अपना अक्षर-समूह तय है।
श्रवण मकर राशि के 10°00′ से 23°20′ तक फैला है, इसलिए इसके चारों पद मकर के नवांश-पद 4, 5, 6 और 7 पर बैठते हैं।
गणना करने पर तालिका यह बनती है — पद 1: नवांश मेष, नामकरण-अक्षर ‘खी’ (कुछ पंचांगों/ग्रंथों में ‘जू’ भी मिलता है — यह एक वास्तविक पाठभेद है, अंदाजा नहीं); पद 2: नवांश वृषभ, नामकरण-अक्षर ‘जे’; पद 3: नवांश मिथुन, नामकरण-अक्षर ‘जो’; पद 4: नवांश कर्क, नामकरण-अक्षर ‘घ’।
यह नामकरण-अक्षर तालिका मुहूर्त-ग्रंथों की प्रचलित नामकरण-सूची से हैं; नामकरण से पहले अपने पंडित या पंचांग से एक बार मिला लेना बेहतर है। अपनी सटीक जन्म-कुंडली से अपना पद जानने के लिए नीचे दिया गया मुफ़्त टूल इस्तेमाल करें।
अपनी नक्षत्र कुंडली पढ़ें
अपनी जन्म तारीख़, समय और स्थान दें, Karma Jyotiṣa आपका सटीक चंद्र-नक्षत्र, उसका पद और कुंडली पर असर मुफ़्त में निकाल देगा।
04अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
श्रवण नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन-सा है?
श्रवण का स्वामी ग्रह विंशोत्तरी प्रणाली में चंद्रमा है — यानी श्रवण में जन्मे चंद्रमा की महादशा चंद्रमा से शुरू होती है। इसके अधिष्ठाता देवता विष्णु हैं।
श्रवण का गण और नाड़ी क्या है?
श्रवण देव गण, अंत्य नाड़ी और वानर योनि का नक्षत्र है। ये तीनों गुण मिलान का बड़ा हिस्सा तय करते हैं — समान नाड़ी वाले जोड़े को शास्त्र में टाला जाता है।
श्रवण नक्षत्र वाले लोग कैसे होते हैं?
सुनने वाला। विष्णु का यह नक्षत्र सीखने, जुड़ने और प्रतिष्ठा का प्रतीक है — समझदार, ग्रहणशील, ज्ञान और परंपरा का रखवाला। असली स्वभाव पद, चंद्रमा की स्थिति और पूरी कुंडली पर निर्भर करता है।
अपना नक्षत्र कैसे पता करें?
आपके जन्म के समय चंद्रमा की सटीक स्थिति ही आपका नक्षत्र और पद तय करती है। Karma Jyotiṣa इसे आपकी जन्म तारीख़, समय और स्थान से मुफ़्त में निकाल देता है।
विस्तृत नक्षत्र-परिचय (हिंदी में): नक्षत्र क्या है — 27 नक्षत्र। अंग्रेज़ी में पूरा प्रोफ़ाइल: Shravana Nakshatra।

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