एक दोस्त ने पूछा, “मृगशिरा नक्षत्र वाले एक चीज़ पर क्यों नहीं टिक पाते?” जवाब सीधी थी, मृगशिरा का प्रतीक ही हिरण का सिर है, हमेशा खोज में रहने वाला।
मृगशिरा नक्षत्र की बुनियादी जानकारी
27 नक्षत्रों में मृगशिरा पांचवां नक्षत्र है, जो वृषभ राशि में 23 डिग्री 20 मिनट से शुरू होकर मिथुन राशि के 6 डिग्री 40 मिनट तक फैला है। इसके देवता सोम (चंद्र देव) हैं, इसका स्वामी ग्रह मंगल है, इसका प्रतीक हिरण का सिर है, और यह देव गण में आता है।
स्वभाव और आम गलतफहमी
मृगशिरा वालों को अस्थिर या भटका समझा जाता है, जबकि असल गुण है खोज और जिज्ञासा। यह नक्षत्र नई चीज़ों, जगहों और विचारों को तलाशने में सबसे आगे रहता है।
सूर्य और मंगल के पदों में बारीक अंतर
सटीक पद के आधार पर मृगशिरा नक्षत्र का असर बदलता है। जिनका मंगल मृगशिरा के पहले पद में है, उनके लिए Mars Mrigashira Pada 1 में बारीक अंतर दिखाता है।
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मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी ग्रह कौन सा है?
मंगल, जो खोज और जिज्ञासा जोड़ता है।
मृगशिरा नक्षत्र की देवता कौन हैं?
सोम, चंद्र देव।
क्या मृगशिरा वाले हमेशा अस्थिर होते हैं?
नहीं, यह गलतफहमी है। बल्कि खोज का स्वभाव होता है।
मृगशिरा किन दो राशियों में फैला है?
वृषभ राशि के अंत और मिथुन राशि के आरंभ में।
मृगशिरा का प्रतीक क्या है?
हिरण का सिर, खोज और जिज्ञासा का प्रतीक।

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