सूर्य ग्रहण 2027: तारीख़, भारत में दृश्यता और सूतक

2027 में दो सूर्य ग्रहण होंगे, और दोनों की कहानी बिलकुल अलग है — एक भारत में पूरी तरह अदृश्य रहेगा, दूसरा आंशिक रूप से दिखेगा और “सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण” कहलाया जा रहा है। दोनों को अलग-अलग समझना जरूरी है, नहीं तो सूतक की गलत धारणा बन जाती है।

2027 के दोनों सूर्य ग्रहण

पहला सूर्य ग्रहण 6 फरवरी 2027 को होगा, जो एक वलयाकार (Annular) सूर्य ग्रहण होगा। यह दक्षिण अमरीका, अंटार्कटिका और दक्षिणी अटलांटिक के कुछ हिस्सों में दिखेगा — भारत में यह कहीं से भी दिखाई नहीं देगा।

जब कोई ग्रहण भारत से दिखाई ही नहीं देता, तो वहाँ सूतक काल (Sutak Kaal) का नियम भी लागू नहीं माना जाता, क्योंकि पारंपरिक रूप से सूतक केवल उसी जगह लागू माना जाता है जहाँ ग्रहण वास्तव में देखा जा सके।

सूर्य ग्रहण 2027: तारीख़, भारत में दृश्यता और सूतक

दूसरा सूर्य ग्रहण 2 अगस्त 2027 को होगा, जो एक पूर्ण (Total) सूर्य ग्रहण होगा और इसकी लंबाई के कारण इसे “सदी का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण” कहा जा रहा है। यह ग्रहण उत्तरी अफ्रीका, सौदी अरब, यमन, एसे क्षेत्रों से होते हुए भारत के अधिकतर हिस्सों से गुजरेगा — भारत में यह आंशिक रूप से दिखाई देगा, हालांकि पूर्णता कहीं नहीं दिखेगी।

अगस्त 2027 का ग्रहण भारत में कब दिखेगा

जहाँ यह ग्रहण भारत में आंशिक रूप से दृश्य होगा, वहाँ शहर-दर-शहर सटीक समय कुछ मिनट आगे-पीछे रहेगा, लेकिन NASA के अनुमानों के आधार पर राष्ट्रीय स्तर पर यह आंशिक ग्रहण भारतीय समयानुसार लगभग दोपहर 3:34 बजे शुरू होकर शाम लगभग 5:53 बजे तक चलने का अनुमान है। जहाँ-जहाँ यह ग्रहण दिखेगा, वहाँ सूतक काल के नियम लागू माने जाते हैं।

सूतक काल का नियम

सूतक काल का धार्मिक नियम सिर्फ उसी स्थानों पर लागू माना जाता है जहाँ ग्रहण वास्तव में देखा जा सकता है। फरवरी 2027 वाला ग्रहण चूँकि भारत में अदृश्य है, इसलिए वहाँ सूतक लागू नहीं होता। अगस्त 2027 वाला ग्रहण जहाँ आंशिक रूप से दिखेगा, वहाँ परंपरागत रूप से सूतक काल लागू माना जाएगा, भले ही यह पूर्ण ग्रहण न हो।

आंखों से सूर्य ग्रहण देखने की सावधानी

सूर्य ग्रहण को कभी भी सीधे नंगी आंखों से नहीं देखना चाहिए, चाहे वह आंशिक हो या पूर्ण। सूर्य ग्रहण देखने के लिए एक मान्यता-प्राप्त ISO 12312-2 सौर चश्मा या सौर फिल्टर वाले प्रोजेक्टर जैसे सुरक्षित तरीकों का उपयोग ही किया जाना चाहिए।

पूर्ण ग्रहण की स्थिति में भी, केवल संपूर्णता (totality) के कुछ सेकंडों के दौरान ही नंगी आंखों से देखना सुरक्षित माना जाता है, और वह भी सिर्फ उस स्थान के लिए जहाँ पूर्णता वास्तव में दिखती है।

संपूर्ण विवरण के लिए हमारा Solar Eclipse 2027 वाला अंग्रेज़ी लेख देखें।

2027 में कितने सूर्य ग्रहण होंगे?

2027 में दो सूर्य ग्रहण होंगे — 6 फरवरी (वलयाकार) और 2 अगस्त (पूर्ण)।

क्या फरवरी 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा?

नहीं, यह भारत में कहीं से भी दिखाई नहीं देगा, इसलिए वहाँ सूतक काल भी लागू नहीं माना जाएगा।

क्या अगस्त 2027 का सूर्य ग्रहण भारत में दिखेगा?

हाँ, यह उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों से आंशिक रूप से दिखाई देगा, पूर्णता कहीं नहीं।

सूतक काल कब लागू माना जाता है?

सूतक काल केवल उन्हीं स्थानों पर माना जाता है जहाँ ग्रहण वास्तव में दृश्य हो।

सूर्य ग्रहण देखने के लिए कौन सी सावधानी ज़रूरी है?

ISO 12312-2 प्रमाणित सौर चश्मा या फिल्टर का उपयोग आवश्यक है, सिर्फ पूर्ण ग्रहण की संपूर्णता के कुछ सेकंड छोड़कर।

यह साइट कोई पूजा सेवा, रत्न या उपाय नहीं बेचती। मैं एक इंजीनियर हूँ, ज्योतिषी या पुजारी नहीं।

पूरा 2027 कैलेंडर

Aditya Sharma

लेखक

Aditya Sharma

मैंने Karma Jyotisha इसलिए बनाया क्योंकि ज्यादातर “AI ज्योतिष” साइट्स बस अंदाजा लगाते हैं। यह साइट वास्तविक विंशोत्तरी दशा और नक्षत्र गणना महर्षि पराशर के BPHS से करती है — गणना की गई, अंदाजा नहीं। मैं एक इंजीनियर हूं, पेशेवर ज्योतिषी नहीं — इसलिए इसे एक गणना-उपकरण मानता हूं, भविष्यवाणी नहीं — और यह हर पेज पर साफ़ लिखता हूं।

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