Karma Jyotiṣa · जर्नल

ज्योतिष जर्नल

गणना आधारित शास्त्रीय लेख — दशा समय-रेखा, नक्षत्र, योग और गोचर, महर्षि पराशर के BPHS पर आधारित।

योग और दोष

गुण मिलान: 36 गुण किस कूट से कितने आते हैं

आठ कूटों में 36 अंक बराबर नहीं बँटे। भकूट और नाड़ी अकेले 15 अंक ले जाते हैं, इसलिए एक ही स्कोर के दो बिल्कुल अलग मतलब हो सकते हैं।

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साढ़े साती और गोचर

गोचर चंद्र लग्न से देखा जाता है, लग्न से नहीं

शास्त्रीय गोचर जन्म राशि से गिना जाता है। इसके पीछे का कारण, वेध का वह नियम जो हर रिपोर्ट छोड़ देती है, और सबसे आम गलती।

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त्योहार और पंचांग

गणेश चतुर्थी 2027: मध्याह्न व्याप्ति और स्थापना का समय

गणेश चतुर्थी 2027 शनिवार, 4 सितंबर को है। तारीख मध्याह्न व्याप्ति से तय होती है, और यही वजह है कि वह कभी-कभी खिसकती दिखती है।

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त्योहार और पंचांग

दिवाली 2027: अमावस्या, प्रदोष और लक्ष्मी पूजन का समय

दिवाली 2027 में 29 अक्टूबर को है। पाँचों दिन की तारीखें, अमावस्या और प्रदोष का नियम, और अमांत-पूर्णिमांत का असली फर्क।

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कुंडली और तकनीक

दशांश D10: करियर की कुंडली, नौकरी का नाम नहीं

दशांश हर राशि के तीन अंश के दस हिस्सों से बनता है। यह कर्म और स्थिति दिखाता है, किसी पेशे का नाम नहीं बताता।

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दशाएँ

दशा संधि: दो दशाओं के बीच का जोड़

दशा संधि पर कौन से ग्रह मिलते हैं, आख़िरी अंतर्दशा कितनी लंबी होती है, और इस जोड़ को ख़तरा बताना कहाँ से शुरू हुआ।

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योग और दोष

भकूट दोष: राशि की दूरी और कब यह कटता है

भकूट छत्तीस में से सात अंक का कूट है। कौन सी राशि दूरियाँ शून्य देती हैं, परिहार के शास्त्रीय नियम, और वह गलती जो रिश्ते तुड़वा देती है।

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कुंडली और तकनीक

आत्मकारक: सबसे ज़्यादा अंश वाला ग्रह

जैमिनी के चर कारक कैसे निकलते हैं, आत्मकारक की गणना में अंश क्यों देखा जाता है राशि नहीं, और यह पराशर के स्थिर कारकों से अलग क्यों है।

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दशाएँ

अंतर्दशा क्या है: महादशा के अंदर का चक्र

अंतर्दशा का सूत्र, नौ उपअवधियों का क्रम, और वह गणित जिससे हर अंतर्दशा की अवधि दिनों तक निकाली जा सकती है।

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त्योहार और पंचांग

अभिजित मुहूर्त: दिन का वह हिस्सा जो लगभग हर दोष काटता है

अभिजित दिन का आठवाँ मुहूर्त है और हर शहर में अलग पड़ता है। इसकी गणना, बुधवार वाला अपवाद और वह गलती जो लगभग सब करते हैं।

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नक्षत्र

गुरु श्रवण नक्षत्र पद 4 में: जब बड़ा ग्रह अपने सहज क्षेत्र से बाहर काम करता है

गुरु का श्रवण नक्षत्र के चौथे पद में होना मकर राशि यानी नीच स्थिति दर्शाता है, साथ ही कर्क नवांश से मिलने वाला एक ईमानदार, बिना डर वाला संतु

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नक्षत्र

गुरु उत्तराषाढ़ा नक्षत्र पद 1 में: जब राशि और नवांश दोनों एक ही बात कहें

गुरु का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र के पहले पद में होना वर्गोत्तम स्थिति बनाता है, धनु राशि और धनु नवांश दोनों एक साथ, जो इस सीरीज़ का सबसे मजबूत सं

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