एक जौहरी ने बताया था कि साल भर में उसकी दुकान पर सबसे ज्यादा भीड़ अक्षय तृतीया के दिन होती है, और इसके लिए किसी मुहूर्त की जरूरत नहीं पड़ती।
2027 की तारीख
अक्षय तृतीया 2027 शनिवार, 8 मई को पड़ेगी। यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि है।
स्वयं सिद्ध मुहूर्त क्यों कहा जाता है
अक्षय का अर्थ है जो कभी क्षीण न हो। ज्योतिष में ज्यादातर तिथियों के लिए सूर्योदय के समय के सापेक्ष सटीक गणना करनी पड़ती है, लेकिन अक्षय तृतीया पूरे दिन शुभ मानी जाती है, इसीलिए इसे स्वयं सिद्ध मुहूर्त कहा जाता है।
इस दिन सोना खरीदना, नया व्यापार शुरू करना या कोई बड़ा निर्णय लेना शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि जो इस दिन शुरू होता है वह बढ़ता ही रहता है। यह भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम की जयंती भी मानी जाती है।
सोना खरीदने की परंपरा
इस दिन सोना खरीदना काफी प्रचलित है, मान्यता है कि सोना सौभाग्य और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है, बशर्ते यह फिजूल खर्च न बनकर सोची-समझी बचत हो। दुर्गा पूजा से जुड़ी सरस्वती पूजा की जानकारी दुर्गा पूजा 2027 में देखें।
यह साइट सोना, रत्न या पूजा सामग्री नहीं बेचती। तिथि पंचांग से जांची गई है।
2027 में अक्षय तृतीया कब है?
शनिवार, 8 मई 2027।
अक्षय तृतीया को मुहूर्त की जरूरत क्यों नहीं पड़ती?
क्योंकि पूरा दिन ही शुभ माना जाता है, स्वयं सिद्ध।
इस दिन क्या खरीदा जाता है?
सोना, चांदी या कोई नई शुरुआत, समृद्धि के प्रतीक के रूप में।
क्या अक्षय तृतीया किसी अवतार से जुड़ी है?
हां, भगवान परशुराम की जयंती के रूप में भी मनाई जाती है।

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