Karma Jyotiṣa · जर्नल

ज्योतिष जर्नल

गणना आधारित शास्त्रीय लेख — दशा समय-रेखा, नक्षत्र, योग और गोचर, महर्षि पराशर के BPHS पर आधारित।

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चित्रा नक्षत्र: देवता, स्वामी ग्रह और इसका असली मतलब

एक कारीगर दोस्त ने बताया था कि उसका नक्षत्र चित्रा है और उसे लगता है इसीलिए उसे डिज़ाइन से इतना लगाव है। यह संयोग गलत नहीं था —…

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मूल नक्षत्र: देवता, स्वामी ग्रह और इसका असली मतलब

एक दोस्त ने पूछा, "मूल नक्षत्र सुनकर डर लगता है, क्या यह विनाश का नक्षत्र है?" निर्रिति देवी का नाम सुनकर यह सवाल आना स्वाभाविक है, लेकिन जड

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वृश्चिक राशि (चंद्र राशि): स्वभाव, स्वामी और वह गलतफहमी जो लगभग सबको होती है

एक दोस्त ने पूछा, "मेरा चंद्रमा वृश्चिक राशि में है, क्या इसीलिए मैं इतना गहराई से सोचता हूं?" चंद्रमा वृश्चिक में होना सचमुच गहरी भावनात्मक

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सिंह लग्न: व्यक्तित्व, पहला भाव और जो लोग अक्सर गलत समझते हैं

एक परिचित ने मुझसे पूछा, "मेरा चंद्रमा कर्क है, लेकिन सब लोग मुझे सिंह जैसा किओं कहते हैं?" जवाब था उसका लग्न सिंह है। यहीं से राशि और…

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बसंत पंचमी 2027: तारीख, महत्व और सरस्वती पूजा से जुड़ाव

स्कूल के दिनों में हर साल एक दिन ऐसा आता था जब क्लास में किताबें एक तरफ रख दी जातीं और पीली सरस्वती प्रतिमा के सामने सब इकट्ठा…

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भरणी नक्षत्र: देवता, स्वामी ग्रह और इसका असली मतलब

एक बार किसी ने मुझसे कहा, "भरणी नक्षत्र सुनते ही डर लगता है, यह तो मौत के देवता का नक्षत्र है।" यह प्रतिक्रिया आम है, क्योंकि भरणी को…

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रोहिणी नक्षत्र: देवता, स्वामी ग्रह और इसका असली मतलब

एक दोस्त ने अपनी जन्मपत्री दिखाते हुए पूछा था, "मेरा नक्षत्र रोहिणी है, इसका मतलब क्या मैं बहुत खूबसूरत हूं?" यह सवाल उतना अजीब नहीं जितना ल

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ज्योतिष

सिंह राशि (चंद्र राशि): स्वभाव, स्वामी और वह गलतफहमी जो लगभग सबको होती है

किसी ने आपकी जन्म-कुंडली दिखाई और कहा "आप सिंह राशि के हैं", और आपने सोचा कि यह वही राशि है जो अखबार के कॉलम में लिखी होती है।…

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भावों में ग्रह

सूर्य प्रथम भाव में: लग्न में बैठा आत्मकारक ग्रह

लग्न में सूर्य का मतलब है कि जन्म भोर से कुछ पहले हुआ। साथ में दो आत्मकारकों का वह फ़र्क़ जो लगातार गड्ड-मड्ड होता है।

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भावों में ग्रह

केतु दशम भाव में: सार्वजनिक रिकॉर्ड की कुंडलियाँ

केतु दशम भाव में लगभग हर बारहवीं कुंडली में मिलेगा। यही अंकगणित हर प्रसिद्ध लोगों वाली सूची को कमज़ोर कर देता है।

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कुंडली और तकनीक

मारक और बाधक: दो अलग बातें जो मिला दी जाती हैं

मारक दूसरे और सातवें भाव के स्वामी हैं, बाधक लग्न की चर, स्थिर या द्विस्वभाव प्रकृति से तय होता है। दोनों अलग ढाँचे हैं।

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भावों में ग्रह

मंगल दशम भाव में: वह ऊर्जा जो काम में दिखती है

दशम भाव मंगल का दिग्बल स्थान है। यहाँ उसे कमज़ोर करने वाली जगह मानना शास्त्र के उलट पढ़ना है।

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