Karma Jyotiṣa · जर्नल

ज्योतिष जर्नल

गणना आधारित शास्त्रीय लेख — दशा समय-रेखा, नक्षत्र, योग और गोचर, महर्षि पराशर के BPHS पर आधारित।

भावों में ग्रह

गुरु पंचम भाव में: कारक अपने ही भाव में

पंचम भाव में गुरु त्रिकोण को पूरा जगा देता है। साथ में कारक भाव नाश वाला वह नियम भी लगता है, जिसे शायद ही कोई ठीक से समझाता है।

पढ़ें →
भावों में ग्रह

चंद्रमा सप्तम भाव में: मन जो साथी में सुकून ढूंढता है

सप्तम भाव के चंद्रमा का शास्त्रीय ढाँचा, पक्ष का असर, और वह बड़ी गलती जो इस स्थिति को साथी का वर्णन मान लेती है।

पढ़ें →
भावों में ग्रह

बुध पंचम भाव में: वह बुद्धि जो अभ्यास से बनती है

पंचम भाव का बुध तेज़ बुद्धि देता है, पर विवेक अलग चीज़ है. साथ ही सूर्य की स्थिति यहाँ गणित से तय हो जाती है.

पढ़ें →
योग और दोष

उच्च और नीच राशि: सही अंश कौन सा है

सातों ग्रहों की परम उच्च डिग्री, नीच बिंदु का नियम, और वह गणना जिससे उच्च बल घटता बढ़ता है।

पढ़ें →
कुंडली और तकनीक

राहु और केतु हमेशा वक्री रहते हैं

राहु और केतु की उल्टी चाल दिखावटी नहीं है। यह चंद्र कक्षा के पात बिंदुओं की असली गति है, जो 18.6 वर्ष में एक चक्र पूरा करती है।

पढ़ें →
कुंडली और तकनीक

नवांश D9: शादी की कुंडली से कहीं ज़्यादा

नवांश को सिर्फ विवाह की कुंडली मान लेना उसे आधा भी नहीं पढ़ना है। यह हर ग्रह की असली ताकत जाँचने का वर्ग है।

पढ़ें →
नक्षत्र

नक्षत्र वृक्ष: 27 नक्षत्रों के पेड़ और उनका मूल स्रोत

सत्ताईस नक्षत्रों की वनस्पति सूची, वह जगह जहाँ से यह आई है, और सूची के भीतर मौजूद एक साफ़ विसंगति।

पढ़ें →
नक्षत्र

नक्षत्र पद क्या होता है: एक नक्षत्र के चार हिस्से

हर नक्षत्र चार पदों में बँटा है और हर पद ठीक एक नवांश के बराबर है। 108 पद, 108 नवांश, और एक ही अटूट चक्र।

पढ़ें →
नक्षत्र

नक्षत्र क्या है: 27 नक्षत्रों की पूरी सूची

नक्षत्र निरयण राशिचक्र का 13 अंश 20 कला वाला भाग है। पूरी सूची, हर नक्षत्र का स्वामी, पद, और विंशोत्तरी दशा से इसका सीधा संबंध।

पढ़ें →
नक्षत्र

नक्षत्र देवता और चिन्ह: पढ़ने की असली कुंजी

नक्षत्र को सिर्फ उसके स्वामी ग्रह से पढ़ना आधी जानकारी है। देवता और चिन्ह अक्सर वह बताते हैं जो स्वामी नहीं बता पाता।

पढ़ें →
राशि और लग्न

लग्न के भाव स्वामी: बारह लग्न की पूरी तालिका

बारह लग्नों के लग्नेश, छह योगकारक ग्रह, केंद्राधिपत्य दोष और बाधक स्थान का पूरा नियम एक जगह।

पढ़ें →
त्योहार और पंचांग

गुरु पूर्णिमा 2027: आषाढ़ की पूर्णिमा और अधिक मास का असर

गुरु पूर्णिमा 2027 में 18 जुलाई, रविवार को है। साथ में अधिक मास की वह गणना जो हर साल तारीख़ खिसका देती है।

पढ़ें →