Karma Jyotiṣa · जर्नल

ज्योतिष जर्नल

गणना आधारित शास्त्रीय लेख — दशा समय-रेखा, नक्षत्र, योग और गोचर, महर्षि पराशर के BPHS पर आधारित।

कुंडली और तकनीक

ग्रह दृष्टि: मंगल, गुरु और शनि की विशेष दृष्टि

हर ग्रह सातवें भाव को देखता है. मंगल, गुरु और शनि की अतिरिक्त दृष्टियाँ क्यों हैं, इसका असली कारण दृष्टि-बल के अंश हैं.

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योग और दोष

गण कूट: देव, मनुष्य, राक्षस का असली मतलब

राक्षस गण का मतलब बुरा इंसान नहीं होता। यह स्वभाव की एक श्रेणी है और छत्तीस गुणों में इसका हिस्सा सिर्फ छह का है।

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कुंडली और तकनीक

अस्त ग्रह: सूर्य के पास आकर ग्रह क्यों कमज़ोर पड़ता है

अस्त की सीमा हर ग्रह के लिए अलग है और वह सीमा उसकी चमक से जुड़ी है। साथ में वह गलत व्याख्या जो सबसे ज़्यादा डराती है।

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योग और दोष

योनि कूट: चौदह योनि और चार अंक

योनि कूट की पूरी तालिका, सात वध जोड़ियाँ, और वह अकेली योनि जिसका कोई जोड़ा ही नहीं है।

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त्योहार और पंचांग

तिथि क्या है: चाँद और सूरज के बीच बारह अंश

तिथि दिन नहीं है। यह सूर्य और चंद्रमा के बीच बारह अंश का फासला है, और यही वजह है कि हर व्रत की तारीख पर बहस होती है।

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त्योहार और पंचांग

रक्षा बंधन 2027: राखी का शुभ समय और भद्रा का नियम

रक्षा बंधन 2027 की तिथि, भद्रा का असली नियम, और वह गलतफहमी जो हर साल दोहराई जाती है।

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त्योहार और पंचांग

पंचांग के पांच अंग: तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण

पंचांग के पाँचों अंग किस गणित से बनते हैं, और वह सूर्योदय वाला नियम जिसे लगभग हर कोई गलत समझता है।

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त्योहार और पंचांग

कृष्ण जन्माष्टमी 2027: अष्टमी और रोहिणी का मेल

जन्माष्टमी 2027 बुधवार, 25 अगस्त को है। असली नियम अष्टमी तिथि का निशीथ काल में होना है, रोहिणी नक्षत्र का मिलना उससे अलग बात है।

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त्योहार और पंचांग

हनुमान जयंती 2027: दो तारीखें, दोनों सही

हनुमान जयंती 2027 चैत्र शुक्ल पूर्णिमा की गणना में 20 अप्रैल को है। दूसरी परंपराएँ अलग दिन क्यों रखती हैं, यह पूरा गणित यहाँ है।

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योग और दोष

गज केसरी योग: चंद्रमा से केंद्र, लग्न से नहीं

गज केसरी योग की शर्त गुरु का चंद्रमा से केंद्र में होना है। लग्न से केंद्र देखकर इसे बनाना सबसे आम गलती है।

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त्योहार और पंचांग

छठ पूजा 2027: चार दिन, चार अलग नियम

छठ का संध्या अर्घ्य 4 नवंबर 2027, गुरुवार को है. चारों दिनों के नियम अलग हैं, और पूरी गिनती षष्ठी से होती है.

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दशाएँ

योगिनी दशा: छत्तीस साल का दूसरा दशा तंत्र

योगिनी दशा का पूरा चक्र छत्तीस साल का है, इसलिए हर व्यक्ति की वही योगिनी छत्तीस साल बाद उसी क्रम में लौट आती है।

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